Durge Durghat Bhari Lyrics

श्री दुर्गा देवीची आरती दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी। अनाथ नाथे अम्बे करुणा विस्तारी। वारी वारी जन्म मरणांते वारी। हारी पडलो आता संकट निवारी॥ जय देवी जय देवी महिषासुरमथिनी। सुरवर ईश्वर वरदे तारक संजीवनी॥   त्रिभुवन-भुवनी पाहता तुज ऐसी नाही। चारी श्रमले परन्तु न बोलवे काही। साही विवाद करिता पडले

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Santoshi Mata Ki Aarti Hindi Lyrics

जय सन्तोषी माता, मैया, जय सन्तोषी माता। अपने सेवक जन को, सुख सम्पत्ति दाता॥ जय सन्तोषी माता॥ सुन्दर चीर सुनहरी, माँ धारण कीन्हों। (मैया धारण कीन्हों) हीरा पन्ना दमके, तन श्रृंगार कीन्हों॥ जय सन्तोषी माता॥ गेरू लाल छटा छवि, बदन कमल सोहे। (मैया बदन कमल सोहे) मन्द हंसत करुणामयी, त्रिभुवन

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