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Vishwambhari Stuti Lyrics in English & Gujarati

Vishwambhari Stuti Lyrics in English   Vishwambhari akhil vishwa tani janeta, Vidhya dhari vadanma vasajo vidhata; Door-budhhine door kari sad-buddhi apo, Maampaahi Om Bhagavati Bhava dukha kapo.   Bhulo padi bhavarane bhataku Bhavani, Suzhe nahi lagir koi disha javani; Bhaase bhayankar vali man na utapo, Maampaahi Om Bhagavati Bhava dukha kapo.   Aa rankne ugarava […]
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maruti stotra lyrics

मारुती स्तोत्र | भीमरूपी स्तोत्र | Maruti Stotra Lyrics

भीमरूपी महारुद्रा, वज्रहनुमान मारुती | वनारी अंजनीसूता रामदूता प्रभंजना ||१|| महाबळी प्राणदाता, सकळां उठवी बळें | सौख्यकारी दु:खहारी, दूत वैष्णव गायका ||२|| दीनानाथा हरीरूपा, सुंदरा जगदंतरा | पातालदेवताहंता, भव्यसिंदूरलेपना ||३|| लोकनाथा जगन्नाथा, प्राणनाथा पुरातना | पुण्यवंता पुण्यशीला, पावना परितोषका ||४|| ध्वजांगे उचली बाहो, आवेंशें लोटला पुढें | काळाग्नी काळरुद्राग्नी, देखतां कांपती भयें ||५|| ब्रह्मांडे माईली […]
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हनुमान चालीसा Hanuman Chalisa | Hanuman Chalisa Lyrics

श्रीगुरु चरन सरोज रज निजमनु मुकुरु सुधारि बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार जय हनुमान ज्ञान गुन सागर जय कपीस तिहुँ लोक उजागर राम दूत अतुलित बल धामा अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा महाबीर बिक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के संगी कंचन […]
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श्री गणपती अथर्वशीर्ष | Ganapati Atharvashirsha Lyrics

ॐ नमस्ते गणपतये। त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि।। त्वमेव केवलं कर्त्ताऽसि। त्वमेव केवलं धर्तासि।। त्वमेव केवलं हर्ताऽसि। त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि।। त्वं साक्षादत्मासि नित्यम्। ऋतं वच्मि।। सत्यं वच्मि।। अव त्वं मां।। अव वक्तारं।। अव श्रोतारं। अवदातारं।। अव धातारम अवानूचानमवशिष्यं।। अव पश्चातात्।। अवं पुरस्तात्।। अवोत्तरातात्।। अव दक्षिणात्तात्।। अव चोर्ध्वात्तात।। अवाधरात्तात।। सर्वतो मां पाहिपाहि समंतात्।।3।। त्वं वाङग्मयचस्त्वं चिन्मय। त्वं […]
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श्री रामरक्षास्तोत्रम् | Ram Raksha Stotra

श्रीगणेशायनम: । अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य । बुधकौशिक ऋषि: । श्रीसीतारामचंद्रोदेवता । अनुष्टुप् छन्द: । सीता शक्ति: । श्रीमद्‌हनुमान् कीलकम् । श्रीसीतारामचंद्रप्रीत्यर्थे जपे विनियोग: ॥ ॥ अथ ध्यानम् ॥ ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्‌मासनस्थं । पीतं वासोवसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम् ॥ वामाङ्‌कारूढ-सीता-मुखकमल-मिलल्लोचनं नीरदाभं । नानालङ्‌कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचंद्रम् ॥ ॥ इति ध्यानम् ॥ चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम् । एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ॥१॥ ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम् । जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितम् ॥२॥ […]
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